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कवि- तुषार जोशी
स्वर- सुबोध साठे
अक्षर- दिल अभी पास था
स्रोत- हिन्द-युग्म
3 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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सुबोध जी,
आपकी आवाज़ और संगीत (गिटार) हर गीत में जान फूँक देते है। आपकी कला हो शत-शत नमन। इसकी शुरूआत सुनने पर 'भूल गए जी' होने का भ्रम होता है।
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Anonymous
said...
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bahut khub sir ji :)
_bipin
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shobha
said...
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सुबोध जी
तुषार जी की कविता बहुत सुन्दर आवाज़ दी है आपने । गीत-संगीत दोनो ही बढ़िया लगा ।
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