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कवि- संजय लोधी
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- एक भागीरथ फिर चाहिए
स्रोत- हिन्द-युग्म
4 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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वैसे कल जब मैंने इस कविता को पढ़ा था तो ग़ज़ल की तरह पढ़ रहा था, मगर आपने तो कविता के ही रूप में पढ़कर नया रूप दिया। वैसे आपकी आवाज़ इस बार बुझी-बुझी थी।
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पारुल पारुल
said...
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bahut khuub.....
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Anonymous
said...
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सन्जय जी आवाज़ मे ऊर्जा की कमी अनुभव हुई पर आप जैसे युवाओ का प्रयास बेहद प्रशन्सनीय है,वर्तनीगत त्रुटियो पर ध्यान न दे हिन्दी टाइपिन्ग नही आती है
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Anonymous
said...
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you have to improve in your voice quality
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