कवि- राजीव रंजन प्रसाद स्वर- विकास कुमार अक्षर- काव्य-पल्लवन स्रोत- हिन्द-युग्म
राजीव जी की कविता वहाँ कम पसंद की गई। लेकिन लगता है कि इसे लोग सुन लें तो शायद ज़्यादा पसंद आये।
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