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कवि- प्रो॰ नरेन्द्र पुरोहित
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- काव्य-पल्लवन
स्रोत- हिन्द-युग्म
2 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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सही लय है। लेकिन पता नहीं कविता में कमी है या गायन में मज़ा नहीं आया।
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Hind-Yugm
said...
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जी, कविता में कोई दोष नहीं. दरअसल गलती मेरी ही है. पता नहीं क्यूँ मैं गाने का साहस कर बैठा. आगे से ध्यान रखूँगा.
--विकास
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