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हिन्दी दिवस विशेष : 2

कवि- प्रतिष्ठा शर्मा
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- काव्य-पल्लवन
स्रोत- हिन्द-युग्म

3 Comments:

pratishtha said...

विकास जी,



मुझे लगता था मेरी कवित मुझ से अछ्छी कोई नहीं पढ सकता। पर आपका जवाब नहीं, आप ने तो कवीता मैं जान ङाल दी। बहुत खूब।



प्रतिष्ठा

12:40 PM

Hind-Yugm said...

धन्यवाद प्रतिष्ठा जी!



-- विकास

11:15 AM

शैलेश भारतवासी said...

जब इसे पढ़ा था तो कम प्रभावित हुआ था, लेकिन आपने तो बहुत असरदार तरीके से सुनाया। अच्छा लगा।

4:34 AM

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