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कवि- विपुल शुक्ला
स्वर- विपुल शुक्ला
अक्षर- स्वर्ग में समस्याएँ
स्रोत- हिन्द-युग्म
1 Comments:
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shobha
said...
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विपुल
कविता तो मज़ेदार थी ही ,तुम्हारी आवाज़ में और भी सुन्दर लगी ।
अच्छा लिखते हो और पढ़ते भी अच्छा हो । अपनी कविताओं को इसी
तरह अपनी भी दिया करो । बहुत-बहुत बधाई ।
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