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कवि- विश्व दीपक 'तन्हा'
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- विद्यार्थी
स्रोत- हिन्द-युग्म
2 Comments:
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Anonymous
said...
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एक बार फिर से विकास जी को धन्यवाद देता हूँ ,जिन्होंने मेरी कविता को अपना स्वर दिया है। आपकी आवाज की कशिश के बारे में क्या कहूँ, सुनने वाले खुद-बखुद समझ जाएँगे। मैं तो आपकी आवाज के सम्मोहन में अब तलक डूबा हूँ। आपकी अगली पेशकश के इंतजार में-
विश्व दीपक 'तन्हा'
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पारुल पारुल
said...
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tanhaa ji beautiful lines aur utni hi khuubsurti se vikas ji ne gungunayi hai.....accha lagaa.
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