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तुम्हारी उपमा

कवयित्री- अनुपमा चौहान
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- तुम्हारी उपमा
स्रोत- हिन्द-युग्म

4 Comments:

Anonymous said...

इस बार आपके स्वर का साथ अंग्रेजी के कुछ बोल दे रहे थे। यह प्रयोग मुझे अच्छा लगा। आप हिन्द-युग्म के चटकते और सुरीले स्वर बनते जा रहे हो।

वैसे तो अनुपमा जी की इस रचना की कोई उपमा नहीं है, लेकिन आपकी आवाज ने इसे अमर कर दिया है। मैं स्वीकार करता हूँ कि खुद पढकर मैं इसमें जितना नहीं खोया था, उतना आपसे सुनकर डूब गया। इसे "अतिशयोक्ति " न समझियेगा आप।



-विश्व दीपक 'तन्हा'

8:54 AM

shobha said...

विकास

तुमने तो कमाल ही कर दिया । इतना सुन्दर पढ़ने लगे हो ।

कविता का भाव तुम्हारी आवाज़ से और अधिक स्पष्ट हो रहा है ।

गज़ब है गज़ब । हिन्द युग्म की सभी कविताएँ तुम्हारे स्वर की

प्रतीक्षा कर रही हैं ।

7:31 AM

vikash said...

deepak ji! shobha ji!



aapka kaise dhanyawaad doon....nahi jaanta. kripadrishti banaye rakhen.

12:42 PM

शैलेश भारतवासी said...

इसमें बैकग्राऊँड-संगीत का चुनाव बहुत बेहतर ढंग से किया गया है और उपर से आपकी आवाज़ के ज़ादू। कोई भी सुनेगा तो उसका दुबारा सुनने का मन होगा।

6:09 PM

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