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कवि- गौरव सोलंकी
स्वर- गौरव सोलंकी
अक्षर- पता है चंदू
स्रोत- हिन्द-युग्म
1 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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पहली बार आपकी आवाज़ में कुछ सुन रहा हूँ (मंच पर)। जब आप शुरूआत कर रहे हैं ना 'पता है चन्दू'॰॰॰ बहुत बढ़िया आकर्षण है उस ध्वनि में। बिलकुल लगता है कि आप चन्दू को बता रहे हैं। लेकिन आपकी आवाज़ हरिहरन की तरह लगातर ज़ारी है। कुछ जगहों पर जहाँ पूर्ण विराम है, रुकना चाहिए था। कविता का उत्तार्द्ध आपने बहुत बढ़िया कहा है।
कोशिश ज़ारी रखिए
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