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कवयित्री- रंजना भाटिया
स्वर- रंजना भाटिया
अक्षर- तेरे छूने से
स्रोत- हिन्द-युग्म
3 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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आप बेकार में घबरा रही थीं। अच्छा गाया है। धीरे-धीरे लता मंगेशकर हो जायेंगी।
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alok shankar
said...
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shailesh ji bilkul sach kah rahe hain . bahut achchaa gaya hai ranjana ji aapne
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Ranju
said...
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शुक्रिया शैलेश ज़ी आलोक ज़ी ..आपने मेरा होसला बढ़ाया ..धन्यवाद :)
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