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कवि- सीमा कुमार
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- हर लम्हा एक विस्मय
स्रोत- हिन्द-युग्म
11 Comments:
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Rahul
said...
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Excellent,the back ground score made it seem very professional
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Rahul
said...
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Excellent,the back ground score made it seem very professional
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vishwa deepk
said...
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मित्र, आज सुबह हीं सीमा जी की रचना पढी थी। लेकिन आपकी आवाज में सुनने पर न जाने कहाँ खो गया। संगीत के सान्निध्य के कारण मानो लहरों की स्वर-लहरियाँ कानों में गुंजने लगीं हो और उसपर आपकी आवाज़ का तिलिस्म मानस-पटल को तरंगित कर उठा।
आपसे कुछ और सुनने की प्यास बढ गई है। उम्मीद करता हूँ जल्द हीं कुछ नया मिलेगा।
-विश्व दीपक 'तन्हा'
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शैलेश भारतवासी
said...
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विकास जी,
आपने तो दिल जीत लिया भाई। बैकग्राउंड स्कोर में आपको शत-प्रतिशत अंक दिये जा सकते हैं। कविता में मैं कहीं खो सा गया था। बिलकुल आपने बाँधे रखा। मैं लगभग १० बार सुन चुका हूँ। बस इसी प्रकार लगे रहिए।
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सीमा कुमार
said...
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धन्यवाद विकास, मेरी कविता हो एक नया और सुंदर रूप देने के लिए :)
यहाँ मैंने और भी कुछ लिखा है इस कविता के बारे में : http://lalpili.blogspot.com/2007/07/blog-post_26.html
सीमा कुमार
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समीर लाल
said...
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बहुत बढ़िया प्रस्तुतिकरण, विकास की सम्मोहनी आवाज में. बधाई.
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Anonymous
said...
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बहुत बढ़िया प्रस्तुतिकरण, विकास की सम्मोहनी आवाज में. बधाई.
--समीर लाल
(उपर की टिप्पणी में नाम नहीं आ पाया, अतः पुनः)
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vikash
said...
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aap sabon ka bahut bahut dhanyawaad.
aashaa hai ki aage bhi protsahan milta rahega. :)
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गौरव
said...
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कविता के साथ आपकी आवाज सचमुच उसे बहुत ऊँचाई प्रदान करती है।
और उपयुक्त संगीत एक आध्यात्मिक सी नई दुनिया में ले जाता है।
आपमें सचमुच कविता की भावनाओं को पकड़ने की शक्ति है।
- गौरव सोलंकी
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Ranju
said...
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bahut hi sundar baandh lene waala sawar ...sun ke bahut accha laga
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sunita(shanoo) chotia
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कविता बहुत सुन्दर है और उसे सुनाया भी बहुत सुन्दर तरीके से है...
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