कवि- श्रीकांत मिश्र 'कांत' स्वर- शोभा महेन्द्रू अक्षर- जीवन स्रोत- हिन्द-युग्म
माफ़ कीजिएगा, इस कविता में आपकी आवाज़ वो ज़ादू कहाँ है जो 'चलो कुछ बात करें' में थी।
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