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कवि- देवेश वशिष्ठ 'ख़बरी'
स्वर- देवेश वशिष्ठ 'ख़बरी'
अक्षर- माँ, 'वो' बड़ी प्यारी है
स्रोत- हिन्द-युग्म
3 Comments:
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उन्मुक्त
said...
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मुझे आज ही इस पॉडकास्ट के बारे में पता चला। मैंने कई कवितायें सुनी आर यहां आ के अच्छा लगा।
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उन्मुक्त
said...
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मुझे आज ही इस पॉडकास्ट के बारे में पता चला। मैंने कई कवितायें सुनी आर यहां आ के अच्छा लगा। - उन्मुक्त
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शोभित जैन
said...
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देवेश जी,
ब्लॉगजागत से मेरा परिचय अनायास ही merekavimitra.blogspot के ज़रिए हुआ जिनमे अनेक दिल को छूने वाली कविताएँ पढ़ी ... जिनमें से एक यह भी है ... फिर is site ko बहुत ढूना पर फिर से उस जगह नही पहुँच पाया ...
पर आज उसी कविता को शुणकर दिल प्रसन्न हो उठा ... कृपया अपने स्वत्नन्त्र ब्लॉग का पता दें...इंतज़ार रहेगा ...
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