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कवि- देवेश वशिष्ठ 'ख़बरी'
स्वर- देवेश वशिष्ठ 'ख़बरी'
अक्षर- चल यार कुछ सद्दा लूटें
स्रोत- हिन्द-युग्म
1 Comments:
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sunita(shanoo) chotia
said...
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वाह देवेश गज़ब की आवाज है तुम्हारी… मज़ा आ गया…घर में सभी ने सुना… बचपन की शरारते बहुत याद दिलाई…और तुम्हारी आवाज में तो जादू है…
मेरा आशीर्वाद है हमेशा तुम्हारे साथ्…
सुनीता(शानू)
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