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कवि- गौरव सोलंकी
स्वर- शोभा महेन्द्रू
अक्षर- चलो कुछ बात करें
स्रोत- हिन्द-युग्म
2 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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शोभा जी,
आपकी आवाज़ में बहुत कशिश है। उम्मीद है कि हिन्द-युग्म के श्रोता कविताओं को और बेहतर ढ़ंग से सुन पाएँगे। अगली कविता का इंतज़ार रहेगा।
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Gaurav Shukla
said...
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शोभा जी,
गौरव जी की ऐसी अद्भुत कविता आपकी आवाज पा कर जीवंत हो उठी है
आभार
सस्नेह
गौरव शुक्ल
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