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कवि- मनीष वंदेमातरम्
स्वर- शैलेश भारतवासी
अक्षर- आज रात भर
स्रोत- हिन्द-युग्म
1 Comments:
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shobha
said...
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शैलेश
बहुत सुन्दर पढ़ा है । एक गल्ती ठीक कर दूँ -
चुभता रहा का उच्चारण चूभता रहा जैसा लगा है ।
कविता भी सुन्दर है और पढ़ते तो सुन्दर हो ही ।
सस्नेह
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