कवि- अजय यादव स्वर- सुनीता चोटिया अक्षर- अब हम से और.. स्रोत- हिन्द-युग्म
Galat-Palat shaayri hai. ek dam mazaa nahin aayaa
अच्छी कोशिश है। एक-दो बार और मेहनत करेंगी तो आवाज़ ज़ादू बिखेरने लगेगी।
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