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कवि- राजीव रंजन प्रसाद
स्वर- राजीव रंजन प्रसाद
अक्षर- आमचो बस्तर, किमचो सुन्दर था
स्रोत- हिन्द-युग्म
3 Comments:
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शैलेश भारतवासी
said...
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आपकी आवाज़ में कोई कमी नहीं है। दतार-चढ़ाव ठीक है। रिकार्डिंग की जो गुणवत्ता है वो धीरे-धीरे सुधरेगी।
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Ripudaman
said...
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wah wah wah !!!
bahut sundar !
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Anonymous
said...
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वाह,
राजीव जी,कविता बहुत सुन्दर तो है ही..आपके स्वर मे सुन के आनन्द आ गया
बहुत सुन्दर
सस्नेह
गौरव शुक्ल
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